गजलक्ष्मी

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गजलक्ष्मी मूर्ति अंकन में लक्ष्मी का एक स्वरूप। इस स्वरूप में बैठी अथवा खड़ी कमलासना लक्ष्मी के दोनों ओर हाथी जल से अभिषेक करता अंकित किया जाता है। इस प्रकार का प्राचीनतम अंकन भारतीय शक नरेश भाव के सिक्कों पर मिलता है। तदनंतर भारहुत, साँची, बोधगया, अमरावती आदि की बौद्ध कला में प्रचुरता से देखने में आता है। मध्यकालीन कला में इसका विशेष प्रचार हुआ।

गज अभिषिक्त लक्ष्मी की कल्पना का उद्भव सूत्र अज्ञात है। श्रीसूक्त में हस्तिनाद प्रबोधिनी शब्द के प्रयोग से हाथी और लक्ष्मी का संपर्क ज्ञात होता है। हाथी वैभव का प्रतीक माना जाता है और लक्ष्मी समृद्धि की देवी हैं। इस कारण कदाचित्‌ शिल्पियों ने दोनों की यह संयुक्त कल्पना उपस्थित की है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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