उच्चाटन

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उच्चाटन एक प्रकार का मंत्र प्रयोग है, जो प्रेत, पिशाच, डाकिनी आदि के निवारण या नियंत्रण हेतु किया जाता है। इस मंत्र के अनेक प्रकार हैं।

  • आदिम विश्वास है कि प्रेत या डाकिनी के उत्पात या कुदृष्टि से अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं।
  • ऐसा विश्वास किया जाता है कि उच्चाटन से रोगों का शमन और दु:ख का निवारण हो सकता है। यह विश्वास अत्यंत प्राचीन और सार्वभौम है।
  • विज्ञान के प्रसार से यह हटता तो जाता है, परंतु कितने ही देशों में यह अब तक प्रचलित है।
  • दूसरे के मन को अन्यत्र लगा देना, उसे अन्यमनस्क कर देना भी उच्चाटन की एक क्रिया मानी जाती है।
  • उच्चाटन की विविध क्रियाएँ हैं। इनका प्रयोग बिना मंत्र के किया जाता है और मंत्र के साथ भी।
  • विधिपूर्वक इनका प्रयोग करना अनेक लोगों का व्यवसाय है। ये लोग दावा करते हैं कि मंत्र के द्वारा भूत, प्रेत और पिशाच भगाए जा सकते हैं और डाकिनी को नियंत्रित तथा निष्क्रिय किया जा सकता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  • सं.ग्रं- मंत्रमहोदधि; मंत्रमहार्णव
  • मथुरा लाल शर्मा, हिन्दी विश्वकोश, पृष्ठ संख्या 54