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	<title>कोमागाटा मारू - अवतरण इतिहास</title>
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		<updated>2017-01-24T11:35:33Z</updated>

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&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{लेख सूचना&lt;br /&gt;
|पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 3&lt;br /&gt;
|पृष्ठ संख्या=162&lt;br /&gt;
|भाषा= हिन्दी देवनागरी&lt;br /&gt;
|लेखक =&lt;br /&gt;
|संपादक=सुधाकर पांडेय&lt;br /&gt;
|आलोचक=&lt;br /&gt;
|अनुवादक=&lt;br /&gt;
|प्रकाशक=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|मुद्रक=नागरी मुद्रण वाराणसी&lt;br /&gt;
|संस्करण=सन्‌ 1976 ईसवी&lt;br /&gt;
|स्रोत=&lt;br /&gt;
|उपलब्ध=भारतडिस्कवरी पुस्तकालय&lt;br /&gt;
|कॉपीराइट सूचना=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|टिप्पणी=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=लेख सम्पादक&lt;br /&gt;
|पाठ 1=परमेवरीलाल गुप्त&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन सूचना=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''कोमागाटा मारू''' एक जापानी जहाज जिसे भारत के प्रवासी क्रांतिकारियों ने 1915 ई. में चार मास के लिये किराए पर लिया था। उन दिनों कनाडा के प्रवासी भारतीयों और कनाडावासियों के बीच कतिपय श्रम संबंधी प्रश्नों को लेकर विवाद चल रहा था। इससे कनाडा सरकार ने भारतीयों के कनाडा प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। फलत: कनाडा के प्रवासी भारतीयों के इस अंसतोष ने अन्यत्र बसे भारतीय प्रवासियों को उत्तेजित कर दिया और हांगकांग में क्रांतिकारी विचार के लोगों की एक सभा हुई और निश्चय हुआ कि कनाडा में जबर्दस्ती प्रवेश का प्रयास किया जाए। इसके निमित्त उक्त जहाज किराए पर लिया गया और इस कार्य में बाबा गुरु दत्त सिंह नामक एक मलाया प्रवासी सज्जन ने आर्थिंक सहायता प्रदान की। जब यह जहाज प्रवासी भारतीयों के दल को लेकर बैंकूअर पहुँचा तो वह रोक दिया गया और वह जहाज वहाँ तीन मास तक खड़ा रहा पर भारतीयों को उतरने न दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इससे लोगों में यह भाव जागृत हुए कि अँगरेज लोग भारतीयों का पग पग पर अपमान करना चाहते हैं। सम्मानपूर्वक जीवन के लिये आवश्यक है कि भारत को अँगरेजों के चुंगल से आजाद कराया जाए। सैनफ्रांसिस्को (अमरीका) नगर में भारतीयों की एक विराट् सभा हुई। इस सभा में दस हजार प्रवासियों ने भारत को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से भारत चलने का निश्चय किया। सारे संसार के भारतीय प्रवासियों को इस आंदोलन में सम्मिलित होने के लिये गदर नामक पत्र द्वारा आहवान किया गया। बाबा गुरु दत्त सिंह को भी तार दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फलत: कोमागाटा मारू जहाज कनाडा से गदर पार्टी के लोगों को लेकर भारत की ओर रवाना हुआ। रास्ते में जापान से भारी मात्रा में शस्त्रास्त्र भी लिए गए। सशस्त्र क्रांति की योजना भाई परमानंद, सरदार कर्तार सिंह, रासबिहारी बोस आदि ने मिलकर तैयार की। अंग्रेजों से सत्ता छीनने के लिये 21 फरवरी 1915 का दिन निश्चित किया गया। किंतु इसी बीच किसी विश्वासघाती द्वारा अँगरेज सरकार को सारी योजना दो दिन पूर्व ज्ञात हो गई और कोमागाटा मारू के सभी लोग गिरफ्तार कर लिए गए। लगभग 300 व्यक्तियों को उन्होंने मोत के घाट उतार दिया और क्रांति की योजना विफल हो गई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह घटना भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में कोमागाटा मारू के नाम से प्रख्यात है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी_विश्वकोश]][[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>Bharatkhoj</name></author>
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