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	<title>कोरिंथ - अवतरण इतिहास</title>
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		<updated>2017-01-27T12:06:18Z</updated>

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&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{लेख सूचना&lt;br /&gt;
|पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 3&lt;br /&gt;
|पृष्ठ संख्या=168&lt;br /&gt;
|भाषा= हिन्दी देवनागरी&lt;br /&gt;
|लेखक =&lt;br /&gt;
|संपादक=सुधाकर पांडेय&lt;br /&gt;
|आलोचक=&lt;br /&gt;
|अनुवादक=&lt;br /&gt;
|प्रकाशक=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|मुद्रक=नागरी मुद्रण वाराणसी&lt;br /&gt;
|संस्करण=सन्‌ 1976 ईसवी&lt;br /&gt;
|स्रोत=&lt;br /&gt;
|उपलब्ध=भारतडिस्कवरी पुस्तकालय&lt;br /&gt;
|कॉपीराइट सूचना=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|टिप्पणी=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=लेख सम्पादक&lt;br /&gt;
|पाठ 1=नन्हें लाल&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन सूचना=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''कोरिंथ''' (1) यूनान का एक प्राचीन नगर जो उस स्थलडमरूमध्य से डेढ़ मील दक्षिण स्थित है जो मध्य यूनान और पेलोपोनेसस को मिलता तथा सारोनिक और कारेंथिन की खाड़ियों को विलग करता है। यूनान की पौराणिक गाथाओं के अनुसार यह एक समृद्ध सामुद्रिक व्यापार का केंद्र था और यहाँ पाणि (फोनेशियन) व्यापारियों की प्रमुखता थी। होमर के महाकाव्यों के अनुसार यह माइसीन लोगों के अधीन था। इसे डोरनियम लोगों ने जीता था। सामुद्रिक व्यापार से इस नगर के संबद्ध होने के प्रमाण ईसापूर्व आठवीं-सातवीं शती से मिलते हैं। इसकी वास्तविक समृद्धि साइपसेलस और उसके पुत्र के काल (ईसापूर्व सातवीं-छठी शती) में हुई। उस समय इसका प्रभाव पश्चिमी खाड़ी के सभी तटवर्ती प्रदेश पर छा गया था। उसका इतालवी और एड्रियाटिक सागर के व्यापार मार्ग पर प्रभुत्व था। पश्चिमी यूनान का अधिकांश व्यापार इस नगर के हाथ में था। लीडिया, फ्रीजिया, साइप्रस और मिस्र के साथ इसका संपर्क विस्तार हुआ। बर्तन, धातु के सामान, सजावट की सामग्री इस नगर का मुख्य उद्योग था। धातुमूर्तियाँ और बर्तन का भूमध्यसागरीय देशों को बड़ी मात्रा में निर्यात होता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ई. पू. छठीं शती में स्पार्टा के संघ में कोरिंथ सम्मिलित हुआ किंतु अपने आर्थिक साधनों एवं सामरिक महत्व के कारण उसे असाधारण स्वतंत्रता उपलब्ध रही। इस नगर ने क्लोमेनेस प्रथम के विरु द्ध एथेंस वालों के साथ मैत्री संबंध बढ़ाया और अपने व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी एजिना के विरुद्ध उनका साथ दिया। ई. पू. 480 ई. में ईरानियों के विरु द्ध महायुद्ध में कोरिंथ यूनानियों का सदर मुकाम था। उसमें उसकी जल और स्थल सेना ने सक्रिय भाग लिया। तदनंतर इसका इतिहास युद्धों का इतिहास है। ई. पू. 14६ में रोमन कोरिंथ की समस्त कलानिधि उठा ले गए और नगर को नष्ट कर दिया। ई. पू. 4६ में रोमन सम्राट् जूलियस सीज़र ने यहाँ से यूनानियों को निकालकर इतालवी लोगों को बसाया और तब नगर पुन: अपनी व्यापारिक समृद्धि को प्राप्त हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह प्राचीन नगर दो धरातलों पर बसा हुआ था जिनके बीच लगभग 100 फुट का अंतर है। ये दोनों ही धरातल प्राचीन समुद्रतट के अवशेष हैं। आज तो समुद्र यहाँ से डेढ़ मील हट गया है। वहाँ नगर के निकट पश्चिमी बंदरगाह लेच्यूम था जो भीतर की ओर काफी दूर तक धँसा हुआ था और नगर दुर्ग से सटा था। नगर का मध्यवर्ती भाग ऊपरी धरातल के बीच वाले भाग में था। इस प्राचीन नगर के अवशेषों का उत्खनन 18९६ ई. में आरंभ हुआ फलस्वरूप यूनानी और रोमनकाल के अनेक महत्वपूर्ण अवशेष प्रकाश में आए हैं। इनमें आगोरा (प्राचीन बाजार), अपोलो का मंदिर, सार्वजनिक स्नानागार और प्रेक्षागृह मुख्य हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कोरिंथ का आधुनिक नगर स्थलडमरू से पश्चिम प्राचीन नगर से साढ़े तीन मील उत्तरपूर्व स्थित है। जब प्राचीन कोरिंथ भूकंप में नष्ट हो गया तब 1858 ई. में इस नए नगर की स्थापना की गई थी। इस नए नगर को भूकंप ने 1९08 ई. में प्राय: नष्ट कर दिया था। यह अब एक गाँव सा ही रह गया है। अंगूर, जैतून का तेल, रेशम तथा अनाज यहाँ की मुख्य उपज है। (प. ला. गु.)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
(2) मिसिसिपी (उत्तरी अमरीका) का एक नगर जो अलकार्न काउंटी का केंद्र है। और मेंफिस से लगभग ९0 मील पूर्व दक्षिण स्थित है। यहाँ पर मोबाइल, ओहायो तथा दक्षिण रेलमार्ग से यातायात के साधन उपलब्ध है। यहाँ के प्रमुख उद्योग दुग्धपदार्थ मशीन, सूत, ऊन, वस्त्र तथा काष्ठपदार्थ हैं। यह सूत का प्रमुख बाजार है। अपनी भौगोलिक स्थिति तथा रेलवे जंकशन की सुविधा के कारण इस नगर का अमरीका गृहयुद्ध में प्रमुख हाथ रहा। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी_विश्वकोश]][[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>Bharatkhoj</name></author>
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