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	<title>क्रीड़ांगण - अवतरण इतिहास</title>
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		<updated>2017-04-19T10:57:13Z</updated>

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&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{लेख सूचना&lt;br /&gt;
|पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 3&lt;br /&gt;
|पृष्ठ संख्या=333&lt;br /&gt;
|भाषा= हिन्दी देवनागरी&lt;br /&gt;
|लेखक =&lt;br /&gt;
|संपादक=सुधाकर पांडेय&lt;br /&gt;
|आलोचक=&lt;br /&gt;
|अनुवादक=&lt;br /&gt;
|प्रकाशक=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|मुद्रक=नागरी मुद्रण वाराणसी&lt;br /&gt;
|संस्करण=सन्‌ 1976 ईसवी&lt;br /&gt;
|स्रोत=&lt;br /&gt;
|उपलब्ध=भारतडिस्कवरी पुस्तकालय&lt;br /&gt;
|कॉपीराइट सूचना=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|टिप्पणी=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=लेख सम्पादक&lt;br /&gt;
|पाठ 1=इकबाल अहमद&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन सूचना=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''क्रीड़ांगण''' (Stadium) ग्रीस में इलिस (Elis) के मैदान में पहाड़ों एवं नदियों से घिरा हुआ एक मनोरम स्थान है जिसको ओलिंपिया (Olympia) कहते हैं। वहाँ दुनिया का पहला खेल का मैदान बना था। ग्रीक लोग इस बात में विश्वास करते थे कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क हो सकता है। उन्होंने खेल के महत्व को समझा और खेलों को अपनी सभ्यता में ऊँचा स्थान दिया। ग्रीस में लगभग हर बड़े शहर में व्यायामशाला (gymmasium) होती थी जिसमें शहर के नवयुवक जाकर कसरत करते थे। फिर उन्होंने बड़े बड़े खेल संगठित किए जिनमें सारे ग्रीस से नवयुवक आकर भाग लेते थे। इन खेलों में ओलिंपियन, पीथियन, निमियन तथा इस्थमियन (Olympian, Pythian, Nemean and Isthmian) बड़े मशहूर हैं। इन चारों खेलों में सबसे पुराने और सबसे बड़े ओलिंपियन खेल थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओलिंपियन खेल चार साल में एक बार होते थे और जिस महीने में ये होते थे उसमें आपस की लड़ाइयाँ और झगड़े बंद हो जाते थे ताकि नौजवान शांतिपूर्वक आकर उनमें भाग ले सकें और असंख्य दर्शक भी आ सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ओलिंपिया का मैदान बहुत बड़ा था जिसमें दर्शकों के बैठने की पर्याप्त जगह थी और बीच में दौड़ने का मैदान था। इसमें आदमी दौड़ते थे और रथों की दौड़ होती थी। फाँदने की जगह और कुश्ती के अखाड़े भी होते थे। करीब की पहाड़ी के ऊपर जियस (Zeus) का मंदिर था जहाँ ओलिंपिक दौड़ में जीतनेवाले खिलाड़ी ले जाए जाते थे। ओलिंपिक एक दौड़ होती थी जो स्टेड (Stade) या 606 फुट की दूरी में होती थी। स्टेड से ही स्टेडियम (Stadium) शब्द बना। ग्रीस में स्थान स्थान पर ऐसे मैदान थे जहाँ पर दौड़नेवाले ओर देखनेवाले इकट्ठा होते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ग्रीस के बाद रोम में खेलों की बहुत चर्चा रही और रोमवासियों ने कई प्रकार के खेल के मैदान बनवाए। रोम में खेल सरकारी खर्चे पर होते थे तथा बहुधा त्योहारों के अवसर पर आयोजित किए जाते थे। लड़ाई जीतने की खुशी में, या किसी बड़े आदमी के मर जाने पर भी, रोम में खेल होते थे। रोमवासी खेलों के पीछे पागल थे, परंतु उन्हें ग्रीसवासियों की तरह खेल में स्वयं भाग लेने की चाह नहीं थी, वरन देखने का अधिक शौक था। रोम का सबसे बड़ा खेल का मैदान कोलोसियम (Colosseum) था, जिसके खंडहर अब भी मौजूद हैं। इसमें पचास हजार आदमी बैठ सकते थे। रोम के खेलों के मैदान में रथों और मामूली घोड़ों के अलावा और भी खेल होते थे, उदाहरणत: जंगली जानवरों की लड़ाई या जंगली पशुओं एवं आदमियों क ी लड़ाई। एक एक खेल में हजारों जानवर और सैकड़ों आदमी मारे जाते थे। कोलोसियम के निर्माण के अवसर पर जो खेल हुए थे उनमें 9,000 जानवर मारे गए थे। फिर इन मैदानों में ग्लैडिएटरों (Gladiators) क ी लड़ाई भी होती थी। ये लोग मामूली या लड़ाई के कैदी होते थे और आपस में जान की बाजी लगाकर लड़ते थे। जब कोई मारा जाता था तो मैदान दर्शकों के शोर गुल से गूँज उठता था। रोम में खेल के कुछ मैदान ऐसे भी थे जिनमें पानी भर दिया जाता था और एक झील बन जाती थी। इस झील में नियमित रूप से समुद्री लड़ाइयाँ होती थीं और बहुत आदमी मारे जाते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मध्य युग में खेल का महत्व समाप्त हो गया। 19वीं सदी तक खेल का कोई मैदान नहीं बना। सिर्फ स्पेन और मेक्सिको में साँड़ों की लड़ाई के कुछ मैदान बने। इन मैदानों में आदमी साँड़ों से लड़ते थे और हजारों आदमी उसका तमाशा देखते थे। ये लड़ाइयाँ स्पेन में अब भी होती थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
19वीं सदी में यूरोपवालों ने खेल के महत्व को फिर से समझा और ओलिंपिक खेलों को पुनरु ज्जीवित किया (देखें ओलिंपिक खेल)। आधुनिक युग में पहला ओलिंपिक खेल 1896 में एथेंस में आयोजित किया गया और उसके लिये संगमरमर का क्रीडांगण बनाया गया जिसमें 66 हजार आदमी बैठ सकते थे। तब से बराबर खेल के मैदान सारी दुनिया में बनते जा रहे हैं। 20वीं सदी में जितने क्रीडांगण बने हैं, उतने इतिहास के किसी काल में नहीं बने। केवल अमेरिका में ही सौ से ऊपर खेल के मैदान बने हैं, जिनमें बंद एवं खुले दोनों प्रकार के मैदान शामिल हैं। लंदन, न्यूयार्क तथा शिकागो में बहुत बड़े बड़े ढँके हुए क्रीडांगण हैं। इनमें बैडमिंटन, टेनिस, बॉक्सिंग और बर्फ के खेल होते हैं। शिकागो का बंद क्रीडांगण इतना बड़ा है कि उसमें दो लाख आदमी आ सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
खेल के इन मैदानों का आकार भिन्न-भिन्न प्रकार का होता है। कुछ मैदान गोल होते हैं, कुछ अंडे की शकल के, कुछ चौकोर और कुछ घोड़े की नाल की तरह। बीच में दौड़ने वालों के लिए क्रमश: ऊँची होती जानेवाले आसनों की श्रेणियाँ होती है। आजकल के स्टेडियम दर्शनीय होते हैं। इनके सीमेंट के भवन बहुत शानदार और सुंदर होते हैं। ओलिंपिक खेलों का आजकल ढंग यह होता है कि भिन्न-भिन्न देश उनको बारी बारी से अपने यहाँ आयोजित करते हैं। इसलिए जिस देश की बारी होती है उसमें एक बहुत बड़ा स्टेडियम तैयार हो जाता है। बहुत से देशों में आधुनिक स्टेडियम इसी प्रकार बने हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत ने अभी तक ओलिंपिक खेल आयोजित नहीं किए। इसलिये यहाँ पर कोई ऐसा खेल का मैदान नहीं बना जो दूसरे देशों का मुकाबला कर सके। वैसे बंबई का ब्रैबोर्न (Brabourne) स्टेडियम, जहाँ क्रिकेट होता है, और दिल्ली का स्टैडियम, जहाँ दौड़ होती है, काफी शानदार हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
   &lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी_विश्वकोश]][[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>Bharatkhoj</name></author>
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