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	<title>क्रोमियम - अवतरण इतिहास</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;{{लेख सूचना |पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 3 |पृष्ठ स...&amp;#039; के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{लेख सूचना&lt;br /&gt;
|पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 3&lt;br /&gt;
|पृष्ठ संख्या=225&lt;br /&gt;
|भाषा= हिन्दी देवनागरी&lt;br /&gt;
|लेखक =&lt;br /&gt;
|संपादक=सुधाकर पांडेय&lt;br /&gt;
|आलोचक=&lt;br /&gt;
|अनुवादक=&lt;br /&gt;
|प्रकाशक=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|मुद्रक=नागरी मुद्रण वाराणसी&lt;br /&gt;
|संस्करण=सन्‌ 1976 ईसवी&lt;br /&gt;
|स्रोत=&lt;br /&gt;
|उपलब्ध=भारतडिस्कवरी पुस्तकालय&lt;br /&gt;
|कॉपीराइट सूचना=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|टिप्पणी=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=लेख सम्पादक&lt;br /&gt;
|पाठ 1=विंध्यावासिनी प्रसाद&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन सूचना=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''क्रोमियम''' एक रासायनिक तत्व है। इसकी खोज वैक्वेलिन (Vauquelin) तथा क्लैप्राथ (Klaproth) ने की। इसका मुख्य खनिज क्रोमाइट, FeCr2O4, है और इसी से लगभग सब आवश्यक क्रोमियम प्राप्त होता है। अन्य अधिक दुर्लभ खनिज क्रोकोआइट (Crocoite, PbCrO4), मेलांक्रो आइट (Melanchroite) क्रोम-ओकर (Chrome-ochre) इत्यादि है। यह बहुमूल्य पत्थरों (जो इसके कारण रंगीन होते हैं), उल्का पिंडों (meteorites) तथा जीवों की राख में भी निम्नमात्रा में मिलता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
धातु प्राप्त करने की विधियों में क्रोमियम के आक्साइड का उपयोग होता है। 1,5000 सें. पर आक्साइड गरम कर, शुद्ध किया हुआ, सूखा हाइड्रोजन गैस, प्रवाहित करने से अवकरण होता है। ऐल्यूमिनियम धातु के चूर्ण के उपयोग से धातु प्राप्त करने की गोल्डश्मिट (Goldschmidt) की थमाईट विधि अति उत्तम है। क्रोमिक आक्साइड और ऐल्यूमिनियम चूर्ण का मिश्रण वेरियम परॉक्साइड तथा ऐल्यूमिनियम अथवा मैग्नीशियम के फ्यूज से प्रज्वलित करने पर तापक्षेपी (exothermic) क्रिया होती है, जिसमें क्रोमियम धातु पिघली हुई अवस्था में प्राप्त होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
व्यावसायिक मात्रा में क्रोमियम इसी थर्माइट विधि द्वारा अथवा, विद्युद्भट्ठी में सिलिकन द्वारा, आक्साइड के अवकरण से प्राप्त होता है। क्रोमियम के लवण के विद्युद्विश्लेषण से प्राप्त अमलगम को गरम करने पर शुद्ध क्रोमियम मिलता है। क्रोमियम तथा लोहे की एक उपयोगी मिश्रधातु ‘फेरोक्रोम’ सीधे क्रोम आयरनस्टोन को कारबन के साथ विद्युद्भट्ठी में गरम कर बनाई जाती है, जो अधिकतर क्रोमइस्पात बनाने में प्रयुक्त होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोमियम नीली आभायुक्त चमकदार सफेद रंग की कठोर धातु है। इस पर अत्यंत चमकदार पालिश होती है। इस धातु का आपेक्षिक घनत्व 7.1 है। इसका द्रवणांक 1,9000 सें. तथा क्वथनांक 2,2000 सें. हैं। शुद्ध क्रोमियम धातु प्राप्त करने की कठिनाई के कारण वैज्ञानिक को अनेक विभिन्न प्रयोगों में इसके भिन्न भिन्न भौतिक मान (Physical values) प्राप्त हुए हैं। इस धातु में सामान्यतया हाइड्रोजन की बड़ी मात्रा शोषित रहती है। गरम करने पर अनीक-केंद्रित-घन-जाल (face centred cubic lattice) का क्रोमियम प्राप्त होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
विशुद्ध क्रोमियम रासायनिक वस्तुओं के प्रति साधारणतया निष्क्रिय है। इसी कारण इस धातु की बनी अथवा पालिश की हुई वस्तुओं में चमक बनी रहती है। उच्च ताप पर नमक के अम्ल, गंधक तथा हाइड्रोजन सल्फाइड के वाष्प से क्रिया होती है। हाइड्रोक्लोरिक अथवा गंधक के अम्ल में यह घुलता है। यह क्रिया गरम करने, अथवा धातु में अशुद्धियाँ रहने से तीव्र होती हैं। आक्सि-हाइड्रोजन ब्लोपाइप की लौ में गरम करने से चिनगारी निकलने के साथ यह धातु जलती है तथा क्रोमियम का आक्साइड बनता है। क्लोरीन अथवा ब्रोमीन जल, नाइट्रिक, क्रोमिक या क्लोरिक अम्ल, पोटैसियम परमैंगैनेट, फेरिक क्लोराइड के घोल अथवा आक्सीजन में यह निश्चेष्ट (passive) हो जाता है। गरम कर, अथवा ऋ णाग्र ध्रुवण (cathodic polarisation) द्वारा यह कुछ अम्लों के प्रति पुन: सक्रिय (active) किया जा सकता है। सतह को खरोचने पर, अनावृत्त सतह पर क्रिया पुन: संभव होती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहुत सी धातुओं से मिलाने पर क्रोमियम की कई मिश्रित धातुएँ बनती हैं। जस्ता, ऐल्यूमिनियम तथा ऐंटिमनी से प्राप्त मिश्रधातुएँ भंगुर (brittle) होती है। निकल, कोबाल्ट, प्लैटिनम, लोहा और कारबन से मिश्रित क्रोमियम की धातुओं में लोह-क्रोमियम श्रेणी की अनेक प्रकार की धातुएँ, विशेष गुण होने के कारण, विविधि कार्यों में अधिक उपयोगी होती हैं। क्रोमियम की उपस्थिति से लोहे तथा इस्पात में अधिक कठोरता, तनाव, प्रत्यास्थता (elasticity) तथा उत्कृष्ट विन्यास (fine texture) प्राप्त होता है। 1% क्रोमियम तथा उच्च कारबन के ऐसे ही इस्पात से बेयरिंग के छर्रे (balls), शंकु (cones) बेलन बेयरिंग (rollar bearing) तथा दलने और पेरनेवाली (crushing) मशीनें बनाई जाती हैं। अन्य प्रकार के इस्पात में भी क्रोमियम मिलाने से दृढ़ता (toughness) तथा कठोरता बढ़ जाती हैं। क्रोमियम के निकल-इस्पात मोटर के पुर्जे बनाने में काम आते हैं। क्रोम स्टाल से विशेष प्रकार की रेती बनती हैं। 11-14% क्रोमियम तथा 0.3-0.4% कारबन के अकलुष इस्पात (स्टेनलेस स्टील) छुरी काँटे (cutlery) बनाने में प्रयुक्त होते हैं। रसायनिक उपकरणों के लिये प्रयुक्त अकलुष इस्पात में 8-18% क्रोमियम, 8% निकल अथवा 4% मैंगैनीज़ रहता है। अम्ल तथा कास्टिक क्षार की क्रिया के पति यह अवरोधक है। निकल तथा क्रोमियम से निर्मित विद्युदवरोधक तार साधारण विद्युत्‌ चूल्हों में प्रयुक्त होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोमस तथा क्रोमिक आक्साइड, CrO तथा Cr2O3 क्षारीय हैं और अम्ल से लवण बनाते हैं। इनमें क्रोमियम की संयोजकता क्रमश: दो तथा तीन रहती है। क्रोमिक आक्साइड तथा क्रोमिक ऐनहाईड्राइड क्षारों से क्रमश: क्रामाइट तथा क्रोमेट एवं डाइक्रोमेट लवण बनते हैं। इनके अतिरिक्त क्रोमियम डाइआक्साइड CrO2 भी है। क्रोमियम अमलगम पर शोरे के तनु अम्ल की क्रिया से काला क्रोमस आक्साइड प्राप्त होता है। सीधे धातु के आक्सीकरण से, अथवा क्रोमिक हाइड्राक्साइड या कुछ क्रोमेट के उष्माविघटन से, क्रोमिक आक्साइड बनता है। चीनी मिट्टी के बर्तन, अथवा दूसरी वस्तुएँ रँगने और चित्रकला तथा रंगलेपन में प्रयुक्त होनेवाले तरह तरह के स्थायी हरे रंग बनाने में यह काम आता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोमस लवण धातु तथा अम्ल की क्रिया अथवा क्रोमिक लवण के अवकरण से प्राप्त होते हैं। ऐनहाइड़स क्रोमस लवणों का रंग अम्ल के जलीय घोल में नीला होता है। सामान्यतया इनका सरलता से आक्सीकरण होने के कारण ये शक्तिशाली अवकारक यौगिक हैं। कुछ कार्बनिक यौगिकों के अवकरण के लिये भी क्रोमस क्लोराइड का उपयोग होता है। क्रोमिक लवण अधिक स्थायी होते हैं। गरम की हुई धातु, अथवा क्रोमिक आक्साइड और कारबन के मिश्रण पर क्लोरीन प्रवाहित करने से क्रोमिक क्लोराइड बनता है। ब्रोमाइड और आयोडाइड भी गरम क्रोमियम पर हैलोजन की क्रिया से प्राप्त होते हैेंं। ये पानी से मिलकर हाइड्रेट बनाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोमेट तथा डाइक्रोमेट व्यावसायिक महत्व के होने के कारण अधिक मात्रा में बनाए जाते हैं। इनके बनाने में क्रोमाइट के आक्सीकरण की क्रिया का उपयोग होता है। इस कार्य के लिये पहले पोटैसियम नाइट्रेट का उपयोग होता था। हवा के आक्सिजन के उपयोग की विधि द्वारा क्रोमाइट, सोडा ऐश तथा चूने के मिश्रण को प्रतिक्षेपी (reverberatory) भट्टी में गरम करने से सोडियम क्रोमेट बनता है। अन्य अघुलनशील क्रोमेट, जैसे चाँदी, बेरियम सीसा इत्यादि के क्रोमेट, धातु के लवण तथा पोटैसियम डाइक्रोमेट के घोल से द्विग्विच्छेदन (double decom-position) द्वारा सरलता से प्राप्त होते हैं। साधारण क्रोमेट के संयुक्त घोल से गंधक के अम्ल द्वारा, पोटैसियम डाइक्रोमैंट बनता है। यह चमक दार नारंगी रंग का रवेदार लवण, क्रोमियम के बहुत से यौगिक बनाने, साधारण आक्सीकारक वस्तु के समान तथा रासायनिक मात्रात्मक विश्लेषण में उपयोगी होता है। कपड़े की रंगाई छपाई आदि में, चमड़े से उद्योग में तथा लेड, विस्मथ, जस्ता और बेरियम क्रोमेट से चमकीले रंग बनाने में भी इसका उपयोग होता है। डाइक्रोमेट तथा गंधक के सांद्र अम्ल के अति आक्सीकारक क्रोमिक अम्ल के ऐनहाइड्राइड का घोल मिलता है।&amp;lt;ref&amp;gt;सं.ग्रं.----जे. आर. पार्टिंगटन : ए टेक्स्ट बुक ऑव इनॉर्गैंनिक केमिस्ट्री; जे0 एफ0 थॉर्प और एम0 ए0 ह्‌वाइटले : थॉर्प्स डिक्शनरी ऑव ऐप्लाइड केमिस्ट्री।&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी_विश्वकोश]][[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
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