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	<title>चर कार्य - अवतरण इतिहास</title>
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	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
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		<updated>2017-02-11T11:10:38Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;{{लेख सूचना |पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 4 |पृष्ठ स...&amp;#039; के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{लेख सूचना&lt;br /&gt;
|पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 4&lt;br /&gt;
|पृष्ठ संख्या=165&lt;br /&gt;
|भाषा= हिन्दी देवनागरी&lt;br /&gt;
|लेखक =&lt;br /&gt;
|संपादक=रामप्रसाद त्रिपाठी&lt;br /&gt;
|आलोचक=&lt;br /&gt;
|अनुवादक=&lt;br /&gt;
|प्रकाशक=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|मुद्रक=नागरी मुद्रण वाराणसी&lt;br /&gt;
|संस्करण=सन्‌ 1964 ईसवी&lt;br /&gt;
|स्रोत=&lt;br /&gt;
|उपलब्ध=भारतडिस्कवरी पुस्तकालय&lt;br /&gt;
|कॉपीराइट सूचना=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|टिप्पणी=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=लेख सम्पादक&lt;br /&gt;
|पाठ 1=देव राज कयूरिया&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन सूचना=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''चर कार्य''' अर्थात्‌ भेद निकालने का कार्य गुप्तचरों और भेदियों द्वारा किया जाता है। विशेषकर युद्धकाल में सब देश अपने भेदियों को भेजकर दूसरे देशों की सेना, सरकार, उत्पादन, वैज्ञानिक उन्नति आदि के तथ्यों के विषय में सूचना प्राप्त करने का प्रयत्न करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चर कार्य मनोबल की दृष्टि से आपत्तिजनक है और बहुधा ये लोग ही इस कार्य को सफलता से कर सकते हैं जिनको अच्छे बुरे का विचार न हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''निजी चर कार्य -''' इसमें चर का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष अथवा किसी व्यापार के संबंध में सूचना प्राप्त करना होता है। यह सूचना सामाजिक बातचीत और मिलाप के आधार पर प्राप्त की जा सकती है। पारिभाषिक सूचना चर विभाग अथवा निजी गुप्तचरों द्वारा प्राप्त की जा सकती है। निजी चर कार्य में तो कभी कभी असभ्य नीति भी अपना ली जाती है, जैसे पड़ोसियों अथवा व्यक्तिविशेष द्वारा संबंधित लोगों के बारे में सूचना प्राप्त करना।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''अंतरराजनीतिक चर कार्य -''' प्राय: सब सरकारें कुछ गुप्तचर और सूचक (informer) इसलिये रखती हैं कि उन्हें जनता के विचारों की जानकारी रहे और अपने विरोधियों के कार्यक्रमों तथा विचारों से वे अवगत रहें। इस प्रकार के कार्यकर्ता समाज के सब वर्गों से मेलजोल रख सूचना प्राप्त कर सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''शांतिकालीन दूत कार्यों में चर कार्य -''' शांतिकाल में दूतों का कर्तव्य केवल यही नहीं रहता कि वे अपने देश के प्रतिनिधि रहें, अपितु यह देखना भी रहता है कि जिस देश में वे भेजे गए हैं वहाँ की गतिविधि कैसी है। उनसे यह भी आशा की जाती है कि वे वहाँ की उन वर्तमान घटनाओं का ठीक विवरण प्राप्त करें जो उनके अपने देश पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभाव डालें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आधुनिक राजदूतों के पास हर कार्य में निपुण नभ, जल तथा स्थल की सेना और व्यापार संबंधी कार्यकर्ता होते हैं। इनका कार्य दूसरे देशों की प्रत्येक राजनीतिक गतिविधि पर ध्यान रखना होता है। इसलिये हम राजदूत को राज-संरक्षण-प्राप्त माननीय गुप्तचर कह सकते हैं। जब तक राजदूत कोई अनुचित कार्य नहीं करता, उदाहरणत: अधिकारियों को रिश्वत देना अथवा काम के लेखों की चोरी करना, तबतक वह चर की परिभाषा की परिधि में नहीं आता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सैनिक चरकार्य अथवा तत्सदृश चरकार्य -''' सैनिक चरकार्य के सिद्धांत और सूचना प्राप्त करने के साधन शांतिकाल और युद्धकाल में भिन्न होते हैं। वर्तमान काल में इस कार्य के लिये दो विभाग खोले जाते हैं। एक पुलिस विभाग और दूसरा सेना विभाग। ये विभाग परस्पर सहायता करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जर्मनी में चरकार्य विभाग की स्थापना 16वीं शताब्दी के मध्य में हुई थी। चरकार्य में जर्मनी ने बड़ी प्रगति की। दो विश्वयुद्धों में जर्मनी का चरविभाग बहुत बढ़ गया था। चरकार्यकर्ताओं और विद्रोहियों पर चलाए गए मुकदमां से पता चलता है कि जर्मन चरकार्य का जाल व्यापक रूप से फैला हुआ था। हालैंड निवासी जर्मन गुप्तचर माताहारी का मुकदमा विश्वविख्यात मुकदमा था। इसे फ्रांस में गोली से उड़ा दिया गया था। चरविभाग की सहायता से ही रूस की प्रत्येक गतिविधि का ज्ञान प्राप्त कर शक्ति में कम होते हुए भी जापान ने सन 1904-1905 में रूस को पराजित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चरकारर्य के तरीके उद्देश्य पर निर्भर रहते हैं। दो बातें ध्यान में रखनी आवश्यक हैं। एक तो सूचना प्राप्त करना और फिर उन सूचनाओं को अपने अधिकारियों तक पहुँचाना। सूचना प्राप्त करने के लिये या तो चरकार्यकर्ताओं को स्वयं काम करना पड़ता है, या दूसरों को रिश्वत देनी पड़ती है। यदि प्राप्त की हुई सूचनाएँ मौखिक रूप से न भेजी जा सकें तो इस प्रकार के साधन-अपनाए जाते हैं, जैसे गुप्त भाषा और संकेत आदि (साइफर) के प्रयोग।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जो सैनिक गुप्तचर पकड़ लिए जाते हैं, उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाती है। शांतिकाल में प्राय: उन्हें जुर्माने और कारावास का दंड दिया जाता है, परंतु युद्धकाल में ऐसे गुप्तचरों का विचार कोर्टमार्शल द्वारा किया जाता है और उन्हें मृत्युदंड तक दिया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी विश्वकोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Bharatkhoj</name></author>
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