<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://bharatkhoj.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3</id>
	<title>चांद्रायण - अवतरण इतिहास</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://bharatkhoj.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatkhoj.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3&amp;action=history"/>
	<updated>2026-06-08T22:44:19Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.41.1</generator>
	<entry>
		<id>https://bharatkhoj.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3&amp;diff=364523&amp;oldid=prev</id>
		<title>Bharatkhoj: '{{लेख सूचना |पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 4 |पृष्ठ स...' के साथ नया पन्ना बनाया</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://bharatkhoj.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3&amp;diff=364523&amp;oldid=prev"/>
		<updated>2017-02-14T11:51:43Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;{{लेख सूचना |पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 4 |पृष्ठ स...&amp;#039; के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{लेख सूचना&lt;br /&gt;
|पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 4&lt;br /&gt;
|पृष्ठ संख्या=182&lt;br /&gt;
|भाषा= हिन्दी देवनागरी&lt;br /&gt;
|लेखक =&lt;br /&gt;
|संपादक=रामप्रसाद त्रिपाठी&lt;br /&gt;
|आलोचक=&lt;br /&gt;
|अनुवादक=&lt;br /&gt;
|प्रकाशक=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|मुद्रक=नागरी मुद्रण वाराणसी&lt;br /&gt;
|संस्करण=सन्‌ 1964 ईसवी&lt;br /&gt;
|स्रोत=&lt;br /&gt;
|उपलब्ध=भारतडिस्कवरी पुस्तकालय&lt;br /&gt;
|कॉपीराइट सूचना=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|टिप्पणी=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=लेख सम्पादक&lt;br /&gt;
|पाठ 1=रामांकर भट्टाचार्य&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन सूचना=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''चांद्रायण''' एक प्राचीन तप, व्रात अथवा अनुष्ठान। पाणिनि ने इस तप का निर्देश किया है (अष्टाध्यायी 5/1/72)। धर्मसूत्रादि में इसकी प्रशंसा में कहा गया है कि यह सभी पापों के नाश में समर्थ है। जब किसी पाप का कोई प्रायश्चित्त नहीं मिलता, तब चांद्रायण ्व्रात ही वहाँ अनुष्ठेय है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चंद्र की ह्रासवृद्धि के अनुसार चांद्रायण का अनुष्ठान किया जाता है। इस तप के नामकरण का कारण भी यही है (याड स्मृ. 3/323 की मिता. टी.)। इस व्रात के दो भेद हैं - यवमध्य और पिपीलिकामध्य। यवमध्य में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को एक ग्रास का आहार, द्वितीया को दो ग्रास का, इस प्रकार क्रमश: बढ़ाते हुए पूर्णमासी को 15 ग्रास का आहार विहित है। उसके बाद कृष्णपक्ष की प्रतिपदा को 14 ग्रास, द्वितीया को 13 ग्रास, इस प्रकर क्रमश: घटाकर चतुर्दशी को एक ग्रास और अमावास्या को पूर्ण उपवास इस व्रात में निर्दिष्ट है। अल्पाहार और बीच में अधिक आहार करने में यवाकृति के साथ इसका सादृश्य होने से इसका यह नाम पड़ा। पिपीलिकामध्य कृष्णपक्ष की प्रतिपदा को 14 ग्रास ओर क्रमश: घटाकर कृष्ण चतुर्दशी को एक ग्रास और अमावास्या में पूर्ण उपवास, उसके बाद शुल्क प्रतिपदा को एक ग्रास, द्वितीया को दो ग्रास, इस प्रकार बढ़ाकर पूर्णमासी का 15 ग्रास इस पद्धति में अवधि के आरंभ तथा अंत में अधिक आहार और मध्य में अल्पाहार होने के कारण इसका पिपीलिका नाम सार्थक है। एक मत के अनुसार चांद्रायण के पाँच भेद हैं- यवमध्य, पिपीलिकामध्य, यतिचांद्रायण, सर्वतोमुख और शिशुचांद्रायण। चांद्रायण में जो ग्रास (अन्नमुष्टि) लिया जाता है, उसके परिमाण के विषय में भी मतभेद है। निबंधग्रंथों में व्रात और प्रायश्चित्त के विवरण में चांद्रायण का विशद विवरण द्रष्टव्य है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी विश्वकोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Bharatkhoj</name></author>
	</entry>
</feed>