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	<title>चित्रक - अवतरण इतिहास</title>
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		<updated>2017-02-22T11:37:32Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;{{लेख सूचना |पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 4 |पृष्ठ स...&amp;#039; के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{लेख सूचना&lt;br /&gt;
|पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 4&lt;br /&gt;
|पृष्ठ संख्या=219&lt;br /&gt;
|भाषा= हिन्दी देवनागरी&lt;br /&gt;
|लेखक =&lt;br /&gt;
|संपादक=रामप्रसाद त्रिपाठी&lt;br /&gt;
|आलोचक=&lt;br /&gt;
|अनुवादक=&lt;br /&gt;
|प्रकाशक=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|मुद्रक=नागरी मुद्रण वाराणसी&lt;br /&gt;
|संस्करण=सन्‌ 1964 ईसवी&lt;br /&gt;
|स्रोत=&lt;br /&gt;
|उपलब्ध=भारतडिस्कवरी पुस्तकालय&lt;br /&gt;
|कॉपीराइट सूचना=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|टिप्पणी=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=लेख सम्पादक&lt;br /&gt;
|पाठ 1=राधे याम अंवष्ट&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन सूचना=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''चित्रक''' (Chimaera) कुछ उदाहरण ऐसे हैं जहाँ एक ही पौधे का एक ऊतक अपने आनुवंशिक रूप (genotype) में अन्य ऊतकों से भिन्न होता है। जिन पौधों में ऐसे ऊतक पाए जाते हैं, उन्हें कलमी, संकर या कलमज चित्रक (graft hybrid) कहते हैं। जब एक पौधे की टहनी या शाखा दूसरे पौधे की टहनी या शाखा पर कलम द्वारा लगाई जाती है, तब जिस स्थान पर दोनों पौधों के ऊतक एक दूसरे से मिलते हैं वहाँ निकलनेवाली शाखाएँ दोनों पौधों के गुणोंवाली होती हैं। ऐसी शाखाएँ कलमज चित्रक का उदाहरण हैं। कभी कभी चित्रक बिना कलम किए हुए सामान्य पौधों पर भी देखें जा सकते हैं। इस दशा में कायकोशिकाएँ उत्परिवर्तित होकर ऐसे ऊतक बनाती हैं जिनका आनुवंशिक रूप उसी पौधे के अन्य ऊतकों से भिन्न होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस संदर्भ में उन विभज्याओं (meristems) की, जिनसे स्थायी ऊतक बनते हैं, स्थिति का ध्यान रखना आवश्यक है। बाह्यतम एक पंक्तिवाली डर्मेटोजन (dermatogen) बाह्यत्वया (epidermis) को, भ्रूणीयनित्वक्‌ (periblem) आधार ऊतक (ground tissue) को और प्लेरोम (plerome) वाहिनी ऊतक (vascular tissue) को जन्म देते हैं। पुंकेसर, स्त्रीकेसर और क्रमश: उनमें बननेवाले युग्मक बाह्य त्वचा के नीचेवाले ऊतक (sule epidermal tissue) से बनते हैं। यदि उत्परिवर्तित ऊतक (mutated tissue) बाह्यत्वचा से बनते हैं तो लैंगिग प्रजनन द्वारा उत्पन्न पौधे सामान्य ही होते हैं क्योंकि युग्मक, जो लैंगिक प्रजनन के लिये उत्तरदायी हैं, बाह्यत्वचा के नीचेवाले ऊतक से बनते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आनुवंशिक रूप में अंतरवाले ऊतकों के पौधों में वितरण (distribution) के आधार पर तीन प्रकार के चित्रक होते हैं : (1) खंड चित्रक (Sectorial chimaera), (2) परिपूर्ण चित्रक (Periclinal chimaera) और (3) अति चित्रक (Hyperchimaera)।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
टमाटर (Lycopersicum esculentum) और मकोई (Solanum nigrum) को एक दूसरे पर कलम द्वारा लगाकर चित्रक उत्पन्न किए जा चुके हैं। कटी हुई सतह पर कलम जुड़ जाने के पश्चात्‌ शाखा को जुड़े हुए विंदु से होते हुए फिर काट दिया गया। परिणामस्वरूप इस सतह से कई कलियाँ निकलने लगीं। दोनों पौधों की कलमें जुड़ने की जगह के ऊतक मिश्रित प्रकार के देखे गए। जिस जगह से नई कलियाँ निकलती हैं उसके आधार पर चित्रक खंड या परिपूर्ण हो सकते हैं। जहाँ भिन्न भिन्न प्रकार के ऊतक पौधों के तने या पत्तियों में विभिन्न खंड ग्रहण करते हैं, ऐसे चित्रक को खंड चित्रक कहते हैं। इस चित्रक में ऊतक एक दूसरे को घेरते नहीं। यदि कटी हुई सतह से नई कलियाँ बाह्यत्वचा के नीचेवाले ऊतक से इस प्रकार निकलें कि चारों तरफ से घिरे ऊतक एक तरह के और घेरनेवाले ऊतक दूसरी तरह के हों, तो चित्रक परिपूर्ण चित्रक कहा जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मिर्च (Capsicum annuum) के बीजों को कॉल्विसीन (Colchicine) का जलीय विलयन देने से बहुगुणता (pohyploidy) उत्पन्न की गई हैं। इन बीजों से उगे हुए कुछ पौधे चतुर्गुणित (tetraploids), कुछ परिपूर्ण गुणित (periclinalploids) चित्रक, जिनकी बाह्य त्वचा चार गुणित और परागकण दो गुणित होते हैं और बाकी सब द्विगुणित होते हैं। गुणित चित्रकों से उत्पन्न पीढ़ी सामान्य पौधों की होती है, क्योंकि केवल बाह्मत्वचावाली कोशाओं में ही चार गुणित गुणसूत्र (chromosomes) होते हैं और बाह्यत्वचा की नीचेवाली कोशाओं में द्विगुणित गुणसूत्र पाए जाते हैं। चूँकि युग्मक (gametes) बाह्य त्वचा के नीचेवाली कोशाओं से बनते हैं, पौधे जो गुणि चित्रक से उत्पन्न होंगे, द्विगुणित ही होंगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ दशाओं में दो विभिन्न प्रकार के ऊतक मिश्रित रूप से बनते रहते हैं। इस तरह विभिन्न किस्म की कोशाएँ किसी निश्चित भाग में ही न होकर ऊतक में इधर उधर बिखरी रहती हैं। ऐसी व्यवस्थावाले पौधे अतिचित्रक के उदाहरण हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पूर्ण वेष्टित चित्रकों के बीज से उगनेवाले पौधे चित्रौकिक गुणवाले नहीं होते। यह स्वाभाविक है, क्योंकि युग्मक बाह्य त्वचा के नीचे स्थित कोशाओं से बनते हैं और बीज इन्हीं कोशाओं के आनुवंशिक का अनुसरण करते हैं। इसी प्रकार जड़ के कटे हुए टुकड़ों से उत्पन्न पौधे अने आनुवंशिक रूप में आंतरिक ऊतकों से मिलते जुलते हैं, क्योंकि जड़ों की उत्पत्ति अंतर्जात (endogenous) होती है। शाखाओं की उत्पत्ति बहिर्जात (exogenous) होने से चित्रक की शाखाओं के टुकड़ों से उगे पौधे चित्रौकिक गुणवाले हो सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अतिचित्रक के बीज या जड़ के कटे टुकड़ों से उगनेवाले पौधे विभिन्न प्रकार के होते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी विश्वकोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<author><name>Bharatkhoj</name></author>
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