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	<title>विदकुन क्विजलिंग - अवतरण इतिहास</title>
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		<updated>2017-02-28T11:28:58Z</updated>

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&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{लेख सूचना&lt;br /&gt;
|पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 3&lt;br /&gt;
|पृष्ठ संख्या=256&lt;br /&gt;
|भाषा= हिन्दी देवनागरी&lt;br /&gt;
|लेखक =&lt;br /&gt;
|संपादक=सुधाकर पांडेय&lt;br /&gt;
|आलोचक=&lt;br /&gt;
|अनुवादक=&lt;br /&gt;
|प्रकाशक=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|मुद्रक=नागरी मुद्रण वाराणसी&lt;br /&gt;
|संस्करण=सन्‌ 1976 ईसवी&lt;br /&gt;
|स्रोत=&lt;br /&gt;
|उपलब्ध=भारतडिस्कवरी पुस्तकालय&lt;br /&gt;
|कॉपीराइट सूचना=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|टिप्पणी=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=लेख सम्पादक&lt;br /&gt;
|पाठ 1=परमेश्वरीलाल गुप्त&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन सूचना=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''विदकुन क्विजलिंग''' (1887 -1945 ई.) नार्वे का राजनीतिक। 18 जुलाई, 1887 को फाइरिसडाकल में जन्म। सैनिक शिक्षा के निमित्त सैनिक स्कूल में भर्ती हुआ। 1911 में वहाँ से ग्रेज्यूएट होकर निकला। सेना के साथ साथ परराष्ट्र विभाग में भी काम करता रहा। 1931 में वह नार्वे का रक्षामंत्री बनाया गया। मंत्री के रूप में मजदूर दल को कम्यूनिस्ट बताकर उसकी आलोचना करता रहा। राइखटाग (जर्मन संसद्) के अनुकरण कर उसने अपने कार्यालय में आग लगवा दी तब उसे पदत्याग करना पड़ा। उसके बाद उसने नैजनल सैमलिंग (राष्ट्रीय संघटन) के नाम से अपने एक दल की स्थापना की पर इस दल का एक भी सदस्य स्टाटिंग (संसद्) में चुना न जा सका। तब वह जर्मनी चला गया। अब नाजी सिद्धांतों में उसका विश्वास पक्का हो गया। उसने 1937 में रीगा में हुए बाल्टिक सम्मेलन में अल्फ्रडे रोजेंनबर्ग के साथ भाग लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
द्वितीय महायुद्ध आरंभ होने पर वह हिटलर के सिद्धांतों के समर्थक बन गया और अप्रैल 1940 में नार्वे पर जर्मन आक्रमण से तीन दिन पूर्व वह देशद्रोही की तरह बर्लिन चला गया। उसने नार्वे पर जर्मनो द्वारा अधिकार करने में यह प्रकार की सहायता की। जर्मनों द्वारा नार्वे पर अधिकार हो जाने के बाद क्विजलिंग ने अपने को प्रधान मंत्री घोषित किया और नैजनल सैमलिंग की ओर से मंत्रिमंडल गठित किया। किंतु इस मंत्रिमंडल को जब जर्मनों का अनुमोदन न मिला तो वह जर्मन अधिकारियों को समझाने बर्लिन गया। फलस्वरूप नार्वे की सरकार का शासन जर्मन राइख की ओर से जोजेफटर्बोबेन को दिया गया साथ ही तेरह आदमियों की एकप रामर्शदात्री समिति बना दी गई जिसके अधिकांश सदस्य क्विजलिंग के अनुयायी थे। नार्वे में क्विजलिंग के नैजनल सैमलिंग को एकमात्र राजनीतिक दल कर मान्यता दी गई। छिपे हुए राष्ट्रवादियों को खोजकर पकड़वाने में नार्वे के नाजी दल-हर्ड को उसका सहायक बनाया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महायुद्ध समाप्त होने पर क्विजलिंग गिरफ्तार कर लिया गया और देशद्रोह के अपराध में उसे मृत्युदंड मिला। 24 अक्तूबर, 1945 को आकेर्शुस के दुर्ग में उसे गोली मार दी गई। क्विजलिंग का नाम देशद्रोही के पर्याय के रूप में अनेक भाषाओं में गृहीत किया गया। आज क्विजलिंग का अर्थ है देशद्रोही। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी_विश्वकोश]][[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
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