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	<title>हेनरी कैवेंडिश - अवतरण इतिहास</title>
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		<updated>2017-01-18T11:39:36Z</updated>

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&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{लेख सूचना&lt;br /&gt;
|पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 3&lt;br /&gt;
|पृष्ठ संख्या=146&lt;br /&gt;
|भाषा= हिन्दी देवनागरी&lt;br /&gt;
|लेखक =&lt;br /&gt;
|संपादक=सुधाकर पांडेय&lt;br /&gt;
|आलोचक=&lt;br /&gt;
|अनुवादक=&lt;br /&gt;
|प्रकाशक=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|मुद्रक=नागरी मुद्रण वाराणसी&lt;br /&gt;
|संस्करण=सन्‌ 1976 ईसवी&lt;br /&gt;
|स्रोत=&lt;br /&gt;
|उपलब्ध=भारतडिस्कवरी पुस्तकालय&lt;br /&gt;
|कॉपीराइट सूचना=नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी&lt;br /&gt;
|टिप्पणी=&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
'''हेनरी कैवेंडिश''' (1731-1810 ई.)। विख्यात रसायनज्ञ। इनका जन्म 10 अक्टूबर, 1731 ई. को नाइस में एक संपन्न घराने में हुआ था। इनके पिता डेवनशायर के तीसरे ड्यूक के भाई और माता ड्यूक ऑव केंट की पुत्री थीं। इनके पिता को जलवायु संबंधी निरीक्षणों में रुचि थी और उन्होंने वायुदाब नापनेवाने पारे के बैरोमीटर में अच्छा सुधार किया था। संभवत: उन्हीं से इन्हें प्रायोगिक विज्ञान के प्रति प्रेरणा मिली। प्रारंभिक शिक्षा समाप्तकर के कैंब्रिज विश्वविद्यालय में प्रविष्ट हुए। वहाँ से शीघ्र ही अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा के लिये प्रसिद्ध हो गए और उनकी ख्याति यूरोप में फैल गई। 1760 में वे रॉयल सोसायटी, लंदन के सदस्य बने और नियमित रूप से उसके अधिवेशनों में सम्मिलित होते रहे। सभापति के घर पर जो विचारविमर्श होते उनमें भी वे भाग लेते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वे लगभग 50 वर्ष तक रॉयल सोसायटी के सदस्य रहे। इस अवधि में उन्होंने सोसायटी के फिलासॉफिकल ट्रैजैक्शंस में जो लेख प्रकाशित किए, वे आगे चलकर वैज्ञानिक गवेषणओं की आधारशिला बने। गैस-रसायन (न्यूमैटिक कैमिस्ट्री, Pneumatic Chemistry) वे एक प्रकार से जन्मदाता है। वायु की संरचना के संबंध में उन्होंने महत्वपूर्ण प्रयोग किए और पारद के ऊपर गैसों को संग्रह करने की विधि निकाली; उन्होंने हाइड्रोजन गैस का आविष्कार किया। उन्होंने यह गैस जस्ते और अम्ल के योग से तैयार की थी। उन्होंने अपने प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध किया कि यह गैस हवा की अपेक्षा 11वाँ अंश हल्की है। इस हल्की गैस को उन्होंने गुब्बारों में प्रयोग किया। उनके हाइड्रोजन गैस भरे गुब्बारे वायुयानों के इतिहास में सदा याद किए जाएँगे। उन्होंने संयुक्त गैस (Mixed air) पर भी काम किया और यह सिद्ध किया कि किण्वों की क्रिया द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है। उन्होंने पानी और नाइट्रिक अम्ल की भी संरचना निर्धारित की तथा हाइड्रोजन और नाइट्रोजन के भेद का स्पष्टीकरण किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये बातें यद्यपि आज सामान्य सी जान पड़ती हैं, किंतु 18वीं शती में वे युगप्रवर्तक थीं। कैवेडिश से पूर्व लोग पानी को तत्व समझते रहे। उन्होंने पहली बार यह सिद्ध किया कि पानी हाइड्रोजन और एक अन्य गैस से, जिसका नाम बाद को आक्सिजन पड़ा, मिलकर बना है। उन्होंने नाइट्रस गैस, नाइट्रिक ऑक्साइड आदि गैसों पर भी महत्वपूण्र प्रयोग किए। विद्युत्‌ और उष्मा के संचालन पर भी उन्होंने महत्व के विचार प्रकट किए। उन्होंने पृथ्वी का घनत्व भी नापा; उनके प्रयोगों से पता चला कि पृथ्वी का औसत घनत्व पानी की अपेक्षा 5 1/2गुना अधिक है। रसायन विज्ञान के प्रारंभिक निर्माताओं में कैवेंडिश्‌ का नाम स्मरणीय रहेगा। उनके नाम पर कैंब्रिज में जो कैवेंडिश लेबोरेटरी है, वह संसार की प्रमुख प्रयोगशालाओं में से एक है और युगप्रवर्तक अनुसंधानों के लिये विख्यात है। कैवेंडिश अपने वैज्ञानिक अनुसंधानों में आजीवन इतने तल्लीन रहे कि अपनी संगीत के प्रबंधक से वे वर्ष में केवल एक बार ही मिल पाते थे। वे आजीवन अविवाहित रहे। 24 फरवरी 1810 को उनकी मृत्यु हुई। &lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी_विश्वकोश]][[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>Bharatkhoj</name></author>
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