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०८:१५, ७ जून २०१८ के समय का अवतरण
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अवचेतन
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| पुस्तक नाम | हिन्दी विश्वकोश खण्ड 1 |
| पृष्ठ संख्या | 277 |
| भाषा | हिन्दी देवनागरी |
| संपादक | सुधाकर पाण्डेय |
| प्रकाशक | नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी |
| मुद्रक | नागरी मुद्रण वाराणसी |
| संस्करण | सन् 1964 ईसवी |
| उपलब्ध | भारतडिस्कवरी पुस्तकालय |
| कॉपीराइट सूचना | नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी |
| लेख सम्पादक | डा० शंभुनाथ उपाध्याय |
अवचेतन (सब-कांशस) जो चेतना में न होने पर भी थोड़ा प्रयास करने से चेतना में लाया जा सके। उन भावनाओं, इच्छाओं तथा कल्पनाओं का संगठित नाम जो मानव के व्यवहार को अचेतन की भाँति अज्ञात रूप से प्रभावित करती रहने पर भी चेतना की पहुँच के बाहर नहीं हैं और जिनको वह अपनी भावनाओं,इच्छाओं तथा कल्पनाओं के रूप में स्वीकार कर सकता है। मानसिक जगत में इसका स्थान अहम् तथा अचेतन के बीच माना गया है।
टीका टिप्पणी और संदर्भ