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*घटकर्पर यमकालंकार प्रधान २२ श्लोकात्मक काव्य।  
*घटकर्पर यमकालंकार प्रधान २२ श्लोकात्मक काव्य।  
*विरहिणी नायिका द्वारा अपने दूरस्थ नायक को वर्षारंभ में संदेश भेजे जाने का वर्णन इस काव्य का मूल विषय है।  
*विरहिणी नायिका द्वारा अपने दूरस्थ नायक को वर्षारंभ में संदेश भेजे जाने का वर्णन इस काव्य का मूल विषय है।  

१३:२९, २५ मार्च २०१४ के समय का अवतरण

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  • घटकर्पर यमकालंकार प्रधान २२ श्लोकात्मक काव्य।
  • विरहिणी नायिका द्वारा अपने दूरस्थ नायक को वर्षारंभ में संदेश भेजे जाने का वर्णन इस काव्य का मूल विषय है।
  • इसके रचयिता के विषय में पर्याप्त संशय है।
  • परंपरा में इसको उज्जयिनी नरेश विक्रमादित्य के नवरत्न घटकर्पर की कृति समझते हैं, पर यह मत संगत नहीं जँचता।
  • कालिदास को भी निश्चित प्रमाण उपलब्ध नहीं।
  • याकोबी ने इस काव्य को कालिदास से प्राचीनतर माना है।
  • लेखक की गर्वोक्ति है कि जो यमकालंकार के प्रयोग में इस काव्य का अतिक्रमण करेगा, उसके लिये लेखक घट के टूटे हुए टुकड़ों में पानी भरेगा।
  • इसके कई संस्करण प्रचलित है।
  • इसपर अभिनवगुप्त कृत विवृति प्रकाशित हो चुकी है।


टीका टिप्पणी और संदर्भ