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इवान अंद्रेयेविच क्रिलोव
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| पुस्तक नाम | हिन्दी विश्वकोश खण्ड 3 |
| पृष्ठ संख्या | 205 |
| भाषा | हिन्दी देवनागरी |
| संपादक | सुधाकर पांडेय |
| प्रकाशक | नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी |
| मुद्रक | नागरी मुद्रण वाराणसी |
| संस्करण | सन् 1976 ईसवी |
| उपलब्ध | भारतडिस्कवरी पुस्तकालय |
| कॉपीराइट सूचना | नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी |
| लेख सम्पादक | प्यौत्र कलेक्सीविच बाराकिन्नकोव |
इवान अंद्रेयेविच क्रिलोव (1769-1844 ई.) रूसी कवि और लेखक। सैनिक अफ़सर के परिवार में मास्को में 2 फरवरी, 1769 ई. को जन्म हुआ और वे आजीवन पेतेरबुर्ग (आधुनिक लेनिनग्राद) में रहे। 1782 से साहित्यिक कार्य आरंभ किया। उन्होंने ‘क़हवादानी’, ‘शैतान’, ‘फ़ैशनवाली दुकान’ (1807), ‘बेटियों के लिये सबक’ (1807) आदि कई प्रहसन लिखे। इनमें तत्कालीन रूसी जागीरदारी, रिश्वतखोरी आदि सामाजिक कुरीतियों की कटु आलोचना की गई है। उन्होंने तीन व्यंगात्मक पत्रिका, ‘भूतों की डाक’, ‘दर्शन’ और ‘संत पेतेरबुर्गस्की मेरकूरी’ भी प्रकाशित की। 1812 ई. से वे पेतेरबुर्ग के सार्वजनिक पुस्तकालय में काम करने लगे। उन्हें व्यंगात्मक कविताओं से विशेष ख्याति मिली। ये कविताएँ सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध हैं। इनका रूप अति सजीव है। इनकी भाषा जनसाधारण की है, इन कारणों से इन रचनाओं को बड़ी लोकप्रियता मिली। इनके अनेक छंद कहावतों और मुहावरों के रूप में प्रचलित हुए। इनकी कविताओं के नौ संग्रह हैं।
टीका टिप्पणी और संदर्भ