खंडप्रलय
खंडप्रलय
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| पुस्तक नाम | हिन्दी विश्वकोश खण्ड 3 |
| पृष्ठ संख्या | 278 |
| भाषा | हिन्दी देवनागरी |
| संपादक | सुधाकर पांडेय |
| प्रकाशक | नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी |
| मुद्रक | नागरी मुद्रण वाराणसी |
| संस्करण | सन् 1976 ईसवी |
| उपलब्ध | भारतडिस्कवरी पुस्तकालय |
| कॉपीराइट सूचना | नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी |
| लेख सम्पादक | सर्वदानंद |
खंडप्रलय भारतीय प्राचीन विश्वसानुसार त्रिदेवों में से प्रथम--ब्रह्मा का एक दिन, एक हजार चतुर्युगी व्यतीत होने पर आंशिक रूप में प्रलय होता है। पुराणों का मत है कि इस खंडप्रलय में स्वर्गलोक से नीचे के सब लोकों का विनाश हो जाता है।
टीका टिप्पणी और संदर्भ