जंग

अद्‌भुत भारत की खोज
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लेख सूचना
जंग
पुस्तक नाम हिन्दी विश्वकोश खण्ड 4
पृष्ठ संख्या 335
भाषा हिन्दी देवनागरी
संपादक राम प्रसाद त्रिपाठी
प्रकाशक नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी
मुद्रक नागरी मुद्रण वाराणसी
संस्करण सन्‌ 1964 ईसवी
उपलब्ध भारतडिस्कवरी पुस्तकालय
कॉपीराइट सूचना नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी
लेख सम्पादक फूलदेवसहाय वर्मा
चित्र:4525-1.jpg
जंग लगना

जंग या मोरचा धातुओं, विशेषकर लोहे, को समान्य आर्द्र वायु में खुला रखने पर उनके स्वच्छ तल पर एक आवरण चढ़ जाता है, जिसे जंग लगना या मोरचा लगना कहते हैं। इससे तल की चमक नष्ट हो जाती है और धातु का धीरे धीरे संक्षारण होता जाता है। लोहे पर जो मोरचा लगता है, वह लाल भूरे रंग का होता है। यह हाइड्रोटेड फेरिक ऑक्साइड (२लो२औ३, ३हा२औ; 2Fe2O3, 3H2O) का बना होता है। अनेक वैज्ञानिकों ने जंग लगने के संबध में अनुसंधान किए हैं, पर उनके परिणाम एक से नहीं हैं। परिणाम बहुत कुछ धातुओं की शुद्धता और समांगता पर निर्भर करता है। कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार जंग लगने में जल की उपस्थिति आवश्यक है, कुछ के मतानुसार कार्बन डाइऑक्सइड या अम्लता का होना आवश्यक है। तुरंत के लगे मोरचे में फेरस हाइड्रॉक्साइड और कार्बोनेट पर्याप्त मात्रा में पाए गए हैं, जिससे पता लगता है कि मोरचा लगने में इनका बनना पहली अवस्था है। लोहे के जंग के संबंध में कैल्वर्ट और क्रम ब्राउन (Calvert and Crum Brown) का सुझाव निम्नलिखित सभीकरणों से प्रकट होता है :

लो+ हा2 औ+ का औ2= लोकाऔ3+ हा2

(Fe+H2 O+CO2=FeCO3+H2)

4लो का औ3+ 6हा2 औ+ औ2= 4लो (औ हा)2+ 4का औ2

(4Fe CO3+6H2 O+O2=4Fe (O H)2+4CO2)

मोडी (Moddy) का कथन है कि शुद्ध लोहे पर वायु और जल की उपस्थिति में भी, यदि उसमें कार्बन डाइ-ऑक्साइड का पूर्ण अभाव है, तो मोरचा नहीं लगता। कार्बन डाइ-ऑक्साइड के कारण ही लोहा पहले फेरस बाइकार्बोनेट (लो(हा का औ३)२, Fe(HCO3)2) बनता है, जिसके ऑक्सीजन के साथ ऑक्सीकरण से, उपर्युक्त समीकरण के अनुसार, फेरिक हाइड्राक्साइड अवक्षिप्त होता है। यदि जल में क्षार रहे, तो लोहे को मोरचा लगने से बहुत कुछ बचाया या कम किया जा सकता है। एक दूसरे वैज्ञानिक के अनुसार लोहे के टुकड़ों पर वोल्टीय सेल के ध्रुव रहते हैं, जिनके बीच की क्रिया से मोरचा लगता है। लैंबर्ट (Lambert) के अनसार समांग (Homogeneous) लोहे के सामन्य वायु में मोरचा नहीं लगता, यद्यपि सामान्य लोहे पर कार्बन डाइऑक्साइड के अभाव में भी मोरचा लगता है।

मोरचे से बचने के लिये लोहे पर पेंट या इनेमल चढ़ाते या चूने से सफेदी करते हैं। लोहे के नलों का अलकतरे के पिच या नैपथा में डुबा कर मोरचे से उनका संरक्षण करते हैं। बार्फ विधि (Barf process) में लोहे को रक्त ताप पर गरम करके भाप के प्रभाव से उसपर फेरोसोफेरिक ऑक्साइड का स्तर चढ़ाकर मोरचे से बचाते हैं। फल रखने के लोहे के डिब्बों को इसी उपचार से मोरचे से सुरक्षित रखते हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ