हरिराम व्यास

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लेख सूचना
हरिराम व्यास
पुस्तक नाम हिन्दी विश्वकोश खण्ड 12
पृष्ठ संख्या 300
भाषा हिन्दी देवनागरी
संपादक कमलापति त्रिपाठी
प्रकाशक नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी
मुद्रक नागरी मुद्रण वाराणसी
संस्करण सन्‌ 1964 ईसवी
उपलब्ध भारतडिस्कवरी पुस्तकालय
कॉपीराइट सूचना नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी
लेख सम्पादक रामबली पांडेय

हरिराम व्यास भक्तप्रवर थे। व्यास जी का जन्म सनाढ्यकुलोद्भव अोड़छानिवासी श्री समोखन शुक्ला के घर मार्गशीर्ष शुक्ला पंचमी, संवत 1567 को हुआ था। संस्कृत के अध्ययन मे विशेष रुचि होने के कारण अल्प काल ही मे इन्होंने पाडित्य प्राप्त कर लिया। अोड़छा नरेश मधुकरशाह इनके मत्रिशष्य थे। व्यास जी अपने पिता की ही भाँति परम्‌ वैष्णव तथा सद्गृहस्थ थे। राधाकृष्ण की अोर विशेष झुकाव हो जाने से ये अोड़छा छोड़कर वृन्दावन चले अाए। राधावल्ल्भ संप्रदाय के प्रमुख अाचार्य गोस्वामी हितहरिवंश जी के जीवन दशर्न का इनके ऊपर ऐसा मोहक प्रभाव पड़ा कि इनकी अंतर्वृत्ति नित्यकिशोरी राधा तथा नित्यकिशोर कृष्ण के निकुंजलीलागान मे रम गई। ऐसी स्थिति चैतन्य संप्रदाय के रूप गोस्वामी अौर सनातन गोस्वामी से इनकी गाढ़ी मेत्री थी। इनकी निधनतिथि ज्येष्ठ शुक्ला 11, सोमवार सन. 1968 मानी जाती है।

इनका धार्मिक दृष्टकोश व्यापक तथा उदार था। इनकी प्रवृत्ति दाशर्निक मतभेदों को प्रश्रय देने की नहीं थीं। राघावल्लभीय संप्रदाय के मूल तत्व - नित्यविहार दशर्न - जिसे रसोपासना भी कहते हैं- की सहज अभिव्यक्ति इनकी वाणी मे हुई है। इन्होंने श्रंगार के अंतर्गत सयोगपक्ष को नित्यलीला का प्राण माना है। राधा का नखशिख अौर श्रंगार परक इनकी अन्य रचनाएँ भी सयमित एवं मर्यादित हैं। 'व्यासवाणी' भक्ति अौर साहित्यिक गरिमा के कारण इनकी प्रढ़तम कृति है। ये उच्च कोटि के भक्त तथा कवि थे। राघावल्लभोय संप्रदाय के हरित्रय मे इनका विशिष्ठ स्थान है।

कृतियाँ - व्यासवाणी, रागमाला, नवरत्न अौर स्वधर्म (दोनों संस्कृत तथा अप्रकाशित)।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

सन्दर्भ. ग्रन्थ;

प. बलदेव उपाध्याय: भागवत संप्रदाय; श्री वासुदेव गोस्वामी: भक्त कवि व्यास जी; डॉ. विजयेंद्र स्नातक: राधावल्लभ संप्रदाय सिद्धांत अौर साहित्य।

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