"आमोस": अवतरणों में अंतर
नेविगेशन पर जाएँ
खोज पर जाएँ
| [अनिरीक्षित अवतरण] | [अनिरीक्षित अवतरण] |
Bharatkhoj (वार्ता | योगदान) ('{{लेख सूचना |पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 1 |पृष्ठ स...' के साथ नया पन्ना बनाया) |
Bharatkhoj (वार्ता | योगदान) No edit summary |
||
| पंक्ति १: | पंक्ति १: | ||
{{भारतकोश पर बने लेख}} | |||
{{लेख सूचना | {{लेख सूचना | ||
|पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 1 | |पुस्तक नाम=हिन्दी विश्वकोश खण्ड 1 | ||
०९:५९, १४ जून २०१८ के समय का अवतरण
| चित्र:Tranfer-icon.png | यह लेख परिष्कृत रूप में भारतकोश पर बनाया जा चुका है। भारतकोश पर देखने के लिए यहाँ क्लिक करें |
आमोस
| |
| पुस्तक नाम | हिन्दी विश्वकोश खण्ड 1 |
| पृष्ठ संख्या | 394 |
| भाषा | हिन्दी देवनागरी |
| संपादक | सुधाकर पाण्डेय |
| प्रकाशक | नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी |
| मुद्रक | नागरी मुद्रण वाराणसी |
| संस्करण | सन् 1964 ईसवी |
| उपलब्ध | भारतडिस्कवरी पुस्तकालय |
| कॉपीराइट सूचना | नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी |
| लेख सम्पादक | रेवरेंड कामिल बुल्के |
आमोस (लगभग 750 ई. पू.)। आमोस के उपदेशों का सग्रंह बाइबिल में सुरक्षित है और आमोस का ग्रंथ कहलाता है। ये बारह गौण नबियों में से हैं। ईश्वर की प्रेरणा से उन्होंने मूर्तिपूजा के कारण यहूदी के नारा की नबूबत की थी; इसलिए इनको 'सर्वनाश का नबी' कहा गया है। ये साधारण शिक्षाप्रापत एवं स्पष्टवादी ग्रामीण थे। इन्होंने अन्याय, धनिकों, द्वारा दरिद्रों के शोषण तथा धर्म में निर्जीव कर्मकांड की निंदा की है।[१]
टीका टिप्पणी और संदर्भ
- ↑ सं.ग्रं.-थेईज, जे.: देर प्राफेट आमोस, बॉन, 1937।